शीर्षक – पछतावे की यात्रा लेखिका – डॉ कंचन जैन किस वेदना का सार है। “पछतावा” काश ये ना किया होता और काश यह क्या होता तक की यात्रा है।” जो व्यक्ति गलती करें और गलती ना माने। उसे उसके कर्मों का जो फल मिलता है उसे पछतावा कहते हैं। गलती की परिभाषा या कहें मनुष्य में एक विकार । जो उसे उसकी गलती कभी उसके अहम के कारण कभी उसके वहम के कारण उसकी मनोस्थिति के कारण कभी परिस्थितियों से भागने के कारण इत्यादि इत्यादि कारण हो सकते हैं। परंतु जब मनुष्य को उसके द्वारा किए गए, कर्म अच्छाई या बुराई का फल मिलता है ।तब उसे एक-एक क्षण वह घटना याद आती है। जब उसने यही कार्य किया था और वह पछताता है, कि काश उसने यह ना किया होता या किसी ने उसका मार्गदर्शन किया होता। परंतु तब तक वह सुधार के समय को खो देता है क्योंकि उसे उसकी करनी का फल मिल रहा होता है । सत्य बेशक खामोश हो और असत्य का शोर 100 व्यक्ति सुन रहे हों। तब भी सत्य एक दिन अपनी आवाज अर्थात उसके कर्म उसे सत्य बना देते हैं जिस तरह एक बंद कमरे में हवा को प्रवेश करने के लिए दरवाजा खुला होने की जरूरत नहीं है, वैसे ही सत्य स्वयं अपना रास्ता बना लेता है ।इस कार्य में ईश्वर सदैव ऐसे व्यक्ति की सहायता करते हैं।